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किस्मत कैसे इंसान के दिमाग को घुमा देती है और वही करवाती है जो नसीब में लिखा होता है?

 किस्मत इंसान के दिमाग को विचारों और कर्मों के माध्यम से प्रभावित करती है, जहां नकारात्मक सोच भटकाव पैदा करती है और सकारात्मक मनोदशा सही दिशा दिखाती है। हिंदू दर्शन में इसे कर्म और भाग्य का संतुलन माना जाता है, जो पूर्व जन्मों के कर्मों से तय होता है लेकिन वर्तमान प्रयासों से बदला जा सकता है। किस्मत कैसे इंसान के दिमाग को घुमा देती है और वही करवाती है जो नसीब में लिखा होता है? (जब इंसान खुद को फैसले लेने वाला समझता है, लेकिन फैसले कहीं और से लिखे जा चुके होते हैं। भूमिका: क्या हम सच में अपने फैसले खुद लेते हैं? कभी आपने महसूस किया है कि आप कुछ और करना चाहते थे… लेकिन ज़िंदगी आपको कहीं और ले गई? आपने सोचा था यह रिश्ता हमेशा चलेगा, लेकिन अचानक सब खत्म हो गया। आपने मेहनत किसी और दिशा में की, लेकिन सफलता किसी और मोड़ पर मिली। यहीं से एक सवाल जन्म लेता है  क्या इंसान अपने दिमाग से चलता है या किस्मत के इशारों पर? और यही सवाल हमें इस ब्लॉग के केंद्र तक ले आता है — किस्मत कैसे धीरे-धीरे इंसान के दिमाग को मोड़ देती है, भ्रमित करती है, और अंत में उससे वही करवा लेती है जो उसके नसीब में प...