सामाजिक न्याय क्या है? परिभाषा, प्रमुख तत्व, संवैधानिक आधार और समकालीन चुनौतियाँ,samajik nyay kya hai
सामाजिक न्याय (Social Justice) वह अवधारणा है जिसमें समाज के सभी सदस्यों को समान सम्मान, अवसर, अधिकार और संसाधनों का निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित किया जाता है। इसमें जाति, धर्म, लिंग, वर्ग, क्षेत्र या किसी भी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। सामाजिक न्याय क्या है? परिभाषा, प्रमुख तत्व, संवैधानिक आधार और समकालीन चुनौतियाँ भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में “सामाजिक न्याय” केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय लक्ष्य है। यह वह विचार है जो समाज के हर वर्ग—चाहे वह आर्थिक रूप से कमजोर हो, सामाजिक रूप से वंचित हो या सांस्कृतिक रूप से हाशिये पर हो—को समान गरिमा और अवसर देने की बात करता है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में “सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय” की स्थापना का वचन दिया गया है। यह विचार केवल आदर्श नहीं, बल्कि राज्य की नीति और शासन का मार्गदर्शक सिद्धांत है। इस लेख में हम सामाजिक न्याय की अवधारणा को गहराई से समझेंगे—इसके दार्शनिक आधार, प्रमुख तत्व, भारतीय संदर्भ, संवैधानिक प्रावधान, समकालीन चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा पर विस्तृत चर्चा करेंगे। 1️⃣ सामाजिक न्याय की अवधारणा ...