भाई, महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर लूटा, यह तो सब जानते हैं। लेकिन राम मंदिर को किसने लूटा?" बस फिर क्या था! चाय ठंडी हो गई और बहस गर्म। महमूद गजनवी ने सोमनाथ को लूटा, लेकिन राम मंदिर को किसने लूटा? भारतीय इतिहास बड़ा विचित्र है। यहाँ इतिहास की किताबों से ज्यादा इतिहास की बहसें मिलती हैं। कुछ लोग इतिहास पढ़ते हैं, कुछ लोग इतिहास पढ़ाते हैं, और कुछ लोग इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार अपडेट भी कर देते हैं। ऐसे ही एक दिन हमारे मोहल्ले के चाचा जी ने चाय की दुकान पर सवाल उछाल दिया— "भाई, महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर लूटा, यह तो सब जानते हैं। लेकिन राम मंदिर को किसने लूटा?" बस फिर क्या था! चाय ठंडी हो गई और बहस गर्म। पहला संदिग्ध: इतिहास की किताबें सबसे पहले शक इतिहास की किताबों पर गया। क्योंकि भारत में अगर कोई चीज सबसे ज्यादा लूटी गई है तो वह है विद्यार्थियों की नींद और इतिहास की किताबें। किताबों से पूछा गया— "बताओ, राम मंदिर को किसने लूटा?" किताब बोली— "मुझे हर सरकार अपने हिसाब से लिखती है, मुझे क्या पता!" दूसरा संदिग्ध: राजनीति फिर राजनीति को कटघ...