सैलरी स्लिप में प्रोफेशनल टैक्स क्या होता है? पूरी जानकारी, नियम, दरें और बचत के तरीके, professional tax kya hota hai
प्रोफेशनल टैक्स एक छोटा लेकिन अनिवार्य राज्य टैक्स है, जो आपकी सैलरी से हर महीने कटता है। अगर आप नौकरी करते हैं या कोई प्रोफेशनल चलते हैं तो अपने राज के नियमों को जरूर समझें।
सैलरी स्लिप में प्रोफेशनल टैक्स क्या होता है? पूरी जानकारी, नियम, दरें और बचत के तरीके
अगर आप नौकरी करते हैं और हर महीने अपनी सैलरी स्लिप ध्यान से देखते हैं, तो आपने “Professional Tax” (प्रोफेशनल टैक्स) नाम का एक कटौती कॉलम जरूर देखा होगा। कई लोग पूछते हैं—
क्या यह इनकम टैक्स से अलग है?
क्यों काटा जाता है?
क्या यह पूरे भारत में लागू है?
कितना कटता है और किस आधार पर?
इस ब्लॉग पोस्ट में हम प्रोफेशनल टैक्स को बिल्कुल सरल भाषा में समझेंगे—उसका अर्थ, संवैधानिक आधार, राज्यवार दरें, सैलरी स्लिप में एंट्री, इनकम टैक्स में छूट, और कुछ व्यावहारिक उदाहरण भी।
प्रोफेशनल टैक्स क्या होता है?
Professional Tax (PT) एक राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) है, जो वेतनभोगी कर्मचारियों, पेशेवरों (जैसे डॉक्टर, वकील, सीए), व्यापारियों और स्वरोज़गार करने वालों पर लागू हो सकता है।
यह कर भारत के संविधान के तहत राज्यों को दिया गया अधिकार है।
इसका संवैधानिक आधार है —
का अनुच्छेद 276 (Article 276)
इस अनुच्छेद के अनुसार, राज्य सरकारें व्यवसाय, व्यापार या पेशे से जुड़े व्यक्तियों पर कर लगा सकती हैं।
महत्वपूर्ण बात:
किसी भी व्यक्ति से एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹2,500 तक ही प्रोफेशनल टैक्स लिया जा सकता है।
प्रोफेशनल टैक्स कौन-कौन से राज्यों में लागू है?
भारत के. सभी राज्यों में प्रोफेशनल टैक्स लागू नहीं है। यह केवल कुछ राज्यों द्वारा ही वसूला जाता है।
उदाहरण के लिए:
महाराष्ट्र
कर्नाटक
पश्चिम बंगाल
तमिलनाडु
तेलंगाना
आंध्र प्रदेश
गुजरात
केरल
वहीं कुछ राज्यों में यह लागू नहीं है, जैसे:
उत्तर प्रदेश
दिल्ली
हरियाणा
इसलिए, यदि आपकी नौकरी किसी ऐसे राज्य में है जहाँ प्रोफेशनल टैक्स लागू है, तभी आपकी सैलरी स्लिप में यह कटेगा।
सैलरी स्लिप में प्रोफेशनल टैक्स कैसे दिखता है?
सैलरी स्लिप में आमतौर पर कटौतियाँ (Deductions) सेक्शन में यह इस तरह दिख सकता है:
- Professional Tax (PT)
- Prof. Tax
- PT Deduction
उदाहरण:
| Earnings | Amount |
|---|---|
| Basic Salary | ₹25,000 |
| HRA | ₹10,000 |
| Gross Salary | ₹35,000 |
| Deductions | Amount |
|---|---|
| PF | ₹3,000 |
| Professional Tax | ₹200 |
| Net Salary | ₹31,800 |
यह राशि सीधे आपकी राज्य सरकार को जमा की जाती है।
कर्मचारी खुद जमा नहीं करता, कंपनी (Employer) आपके behalf पर जमा करती है।
प्रोफेशनल टैक्स की दरें (State-wise Structure)
हर राज्य की दरें अलग-अलग होती हैं। आमतौर पर यह मासिक वेतन के आधार पर तय होती हैं।
उदाहरण:
| मासिक वेतन | प्रोफेशनल टैक्स |
|---|---|
| ₹7,500 तक | शून्य |
| ₹7,501–₹10,000 | ₹175 |
| ₹10,000 से अधिक | ₹200 (कुछ महीनों में ₹300) |
वार्षिक कुल = ₹2,500 (अधिकतम सीमा)
उदाहरण:
- ₹15,000 से अधिक वेतन: ₹200 प्रति माह
क्या प्रोफेशनल टैक्स और इनकम टैक्स एक ही हैं?
नहीं
| प्रोफेशनल टैक्स | इनकम टैक्स |
|---|---|
| राज्य सरकार द्वारा | केंद्र सरकार द्वारा |
| अधिकतम ₹2,500 | आय के अनुसार स्लैब आधारित |
| Article 276 के तहत | Income Tax Act के तहत |
| सभी राज्यों में लागू नहीं | पूरे भारत में लागू |
क्या प्रोफेशनल टैक्स पर इनकम टैक्स में छूट मिलती है?
हाँ
प्रोफेशनल टैक्स को आप इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय Deduction under Section 16(iii) के तहत क्लेम कर सकते हैं।
यह आपकी Taxable Income को कम करता है।
मतलब, आप दोहरी मार नहीं झेलते।
किन लोगों को प्रोफेशनल टैक्स नहीं देना पड़ता?
कुछ विशेष श्रेणियों को छूट मिल सकती है:
- 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति
- दिव्यांगजन
- सेना के कुछ वर्ग
- माता-पिता जिनके पास विकलांग संतान है (कुछ राज्यों में)
यह राज्य के नियमों पर निर्भर करता है।
अगर कंपनी प्रोफेशनल टैक्स जमा न करे तो?
यदि कंपनी आपके वेतन से काटती है लेकिन सरकार को जमा नहीं करती:
- कंपनी पर जुर्माना लग सकता है
- ब्याज और पेनाल्टी लगती है
- कर्मचारी जिम्मेदार नहीं होता (जब तक उसने जानबूझकर धोखाधड़ी न की हो)
क्या फ्रीलांसर या व्यापारी को भी देना पड़ता है?
हाँ, यदि वे ऐसे राज्य में व्यवसाय कर रहे हैं जहाँ PT लागू है।
उन्हें:
- Registration Certificate (RC) लेना होता है
- Annual Return भरना होता है
- स्वयं टैक्स जमा करना होता है
प्रोफेशनल टैक्स का उद्देश्य क्या है?
राज्य सरकारें इस टैक्स का उपयोग करती हैं:
- शिक्षा
- स्वास्थ्य सेवाएँ
- सड़क निर्माण
- राज्य स्तरीय योजनाएँ
यह राज्य के राजस्व (Revenue) का एक छोटा लेकिन स्थिर स्रोत है।
क्या प्रोफेशनल टैक्स कम या ज्यादा हो सकता है?
- राज्य सरकारें दरों में बदलाव कर सकती हैं
- अधिकतम सीमा ₹2,500 प्रति वर्ष से ज्यादा नहीं हो सकती
- राज्य बजट के दौरान संशोधन संभव
प्रोफेशनल टैक्स से जुड़े सामान्य सवाल (FAQ)
Q1. क्या हर कर्मचारी से कटता है?
नहीं, केवल उन्हीं राज्यों में जहाँ यह लागू है।
Q2. क्या सरकारी कर्मचारियों से भी कटता है?
हाँ, यदि राज्य में लागू है।
Q3. क्या यह रिफंड होता है?
नहीं, यह अंतिम कर (Final Tax) है।
Q4. क्या इंटर्न से कटता है?
यदि वेतन निर्धारित सीमा से अधिक है तो हाँ।
एक सरल उदाहरण से समझिए
मान लीजिए राहुल महाराष्ट्र में काम करता है।
- मासिक वेतन: ₹30,000
- PT: ₹200 प्रति माह
वार्षिक = ₹2,400
जब वह ITR फाइल करेगा, तो वह ₹2,400 को Deduction के रूप में क्लेम कर सकता है।
प्रोफेशनल टैक्स की पूरी प्रक्रिया (Step-by-Step)
- Employer Registration
- Employee Salary Slab Check
- Monthly Deduction
- Government Portal पर Payment
- Return Filing
क्या भविष्य में यह टैक्स खत्म हो सकता है?
संभावना कम है, क्योंकि:
- यह राज्यों का संवैधानिक अधिकार है
- राज्य राजस्व का स्रोत है
- राशि बहुत कम है, इसलिए विरोध कम होता है
निष्कर्ष: क्या आपको प्रोफेशनल टैक्स से डरने की जरूरत है?
नहीं
यह एक छोटा, राज्य-स्तरीय कर है, जो अधिकतम ₹2,500 सालाना तक सीमित है।
अगर आपकी सैलरी स्लिप में यह कटता है, तो यह पूरी तरह वैध और संवैधानिक है।
बस ध्यान रखें:
सही राशि कट रही है
ITR में Deduction क्लेम करें
सैलरी स्लिप सुरक्षित रखें

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