पुराणों और महाभारत में सपनों को भविष्यवाणी और शुभ-अशुभ संकेतों के रूप में महत्वपूर्ण माना गया है। ये ग्रंथ सपनों की व्याख्या समय, प्रतीकों और कर्मों से जोड़ते हैं। पुराणों और महाभारत में सपनों का रहस्य जब देवता, भविष्य और चेतना स्वप्नों के माध्यम से बोलते हैं क्या सपने केवल कल्पना हैं या ईश्वर का संकेत? क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में सपनों को इतना महत्व क्यों दिया गया है? क्या कारण है कि महाभारत, विष्णु पुराण, भागवत पुराण और गरुड़ पुराण में सपनों को भविष्य, चेतावनी और आत्मा की भाषा माना गया? आधुनिक विज्ञान जहाँ सपनों को दिमाग की गतिविधि कहता है, वहीं भारतीय शास्त्र उन्हें दैवी संदेश मानते हैं। इस लेख में हम जानेंगे: महाभारत में आए सबसे रहस्यमय सपने पुराणों में स्वप्नों का गूढ़ अर्थ अच्छे और अशुभ सपनों की पहचान क्या आज भी सपने भविष्य बताते हैं? भारतीय दर्शन में स्वप्न का स्थान भारतीय शास्त्रों के अनुसार मनुष्य की चेतना तीन अवस्थाओं में काम करती है: 1️⃣ जाग्रत अवस्था – जब हम जागते हैं 2...