जय श्री राम जय हनुमान। बाबा नीम करोली का वंदना 40 दिन लगातार पढ़ने से नीम करोली बाबा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसे मन की इच्छाओं की पूर्ति होती है।
श्री नीम करोली बाबा वंदना
॥ दोहा ॥
गुरु चरणन में शीश धरूँ, मन में धरूँ विश्वास।
राम-हनुमत नाम जप, बाबा देहु प्रकाश॥
॥ चौपाई ॥
1.जय बाबा नीम करोली,
भक्ति सुधा की गंगा बोली॥
2.हनुमत तेरे प्राण अधीरे,
राम नाम से नैन हैं भीगे॥
3.राम नाम तूने सिखलाया,
भटके मन को मार्ग दिखाया॥
4.दीन-दुखी का तू रखवाला,
तेरी शरण मिटे दुख-ज्वाला॥
5.जिसने बाबा तुझे पुकारा,
तूने उसका दिया सहारा॥
6.कैंची धाम की पावन माटी,
करती मन की दुनिया खाँटी॥
7.जहाँ बजे हनुमत का नारा,
वहाँ मिले बाबा का सहारा॥
8.तेरी वाणी सरल सुहानी,
कर दे निर्मल मन की कहानी॥
9.नहीं दिखावा, नहीं अभिमाना,
राम भक्ति ही तेरा खजाना॥
10.सेवा को तू पूजा बतलाए,
प्रेम से सबको गले लगाए॥
11.ऊँच-नीच का भेद मिटाया,
सबमें राम का रूप दिखाया॥
12.भूखे को तू अन्न खिलाए,
रोते मन को हँसना सिखाए॥
13.जिसके जीवन छाया अँधियारा,
उसके मन में किया उजियारा॥
14.टूटा मन जब हार के बैठा,
बाबा तूने हाथ था ऐंठा॥
15.भय के बादल दूर भगाए,
मन में साहस दीप जलाए॥
16.संकट में जो नाम पुकारे,
बाबा उसके काज सँवारे॥
17.मन में रख दे राम की माला,
जीवन हो जाए सुखमय निराला॥
18.क्रोध-कपट सब दूर भगाओ,
प्रेम-करुणा मन में बसाओ॥
19. लोभ-मोह की गाँठ छुड़ाओ
सच्ची राह हमें दिखलाओ॥
20.हनुमत जैसी भक्ति दिलाना,
राम चरण में शीश झुकाना॥
21.बाबा तेरी छवि मन भाए,
देखत ही मन शांति पाए॥
22.तेरी कृपा की छाँव निराली,
हर ले मन की पीड़ा सारी॥
23.नाम तुम्हारा अमृत धारा,
पी ले जो मन हो उजियारा॥
24.राम-राम जब मुख पर आए,
जीवन के संताप मिटाए॥
25.सेवा में ही सुख समझाओ,
अहंकार को दूर भगाओ॥
26.अपनेपन का भाव जगाओ,
सबको अपना गले लगाओ॥
27.बाबा ऐसी बुद्धि हमें दो,
सत्य मार्ग पर चलना सिखाओ॥
28.धन से बढ़कर प्रेम सिखाओ,
मान से बढ़कर सेवा बतलाओ॥
29.जब जीवन में दुख घिर जाए,
राम नाम फिर याद दिलाए॥
30.जब मन अपना डगमग डोले,
बाबा नाम अमृत सा बोले॥
31.तन-मन-धन प्रभु को अर्पण,
यही बने जीवन का दर्पण॥
32.तेरी भक्ति हृदय में आए,
हर पल राम नाम गुण गाए॥
33.कैंची धाम की धूल मिले जो,
भाग्य उसी का फूल खिले वो॥
34.हनुमत चरणों की रखवाली,
बाबा तेरी कृपा निराली॥
35.दुखियों के तुम बने सहारे,
भटके जन के भाग्य सँवारे॥
36.जग में चाहे कोई न हमारा,
राम नाम हो एक सहारा॥
37.अंत समय जब प्राण निकलें,
राम नाम ही हों अधर खिलें॥
38.इतनी कृपा करो हे बाबा,
मन में बस जाए राम का धागा॥
39.जन्म-जन्म की यही पुकारा,
राम-हनुमत चरण हमारा॥
40.नीम करोली बाबा प्यारे,
रखना सदा चरणों में हमारे॥
॥ समापन दोहा ॥
बाबा तेरी शरण में, मिटे मन का संताप।
राम-हनुमत नाम से, जीवन हो निष्पाप॥
राम नाम हो साँस में, हनुमत नाम अधार।
नीम करोली बाबा की, जय-जय हो हर बार॥
॥ जय श्री राम ॥
॥ जय बजरंगबली ॥
॥ जय नीम करोली बाबा ॥

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