ISRO कम लागत में अंतरिक्ष मिशन इसलिए पूरा करता है क्योंकि यह स्वदेशी तकनीक, मॉड्यूलर डिज़ाइन और कुशल परीक्षणों पर जोर देता है।इसके वैज्ञानिकों की कम मजदूरी और सिमुलेशन-आधारित विकास भी खर्च घटाते हैं। ISRO कम लागत में अंतरिक्ष मिशन कैसे पूरा करता है? चंद्रयान मिशन से समझें भारत का “लो-कॉस्ट स्पेस मॉडल” और उसके ट्रेड-ऑफ जब दुनिया अरबों डॉलर खर्च करके अंतरिक्ष मिशन भेजती है, तब भारत का ISRO (Indian Space Research Organisation) अपेक्षाकृत कम बजट में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कर लेता है। चंद्रयान-3 की सफलता ने यह सवाल फिर से चर्चा में ला दिया — आखिर ISRO कम लागत में इतने जटिल मिशन कैसे पूरा करता है? क्या यह केवल कम वेतन की वजह से है? क्या गुणवत्ता से समझौता किया जाता है? या फिर इसके पीछे एक अलग इंजीनियरिंग दर्शन काम करता है? इस ब्लॉग पोस्ट में हम चंद्रयान मिशन को केस स्टडी बनाकर समझेंगे कि ISRO का लो-कॉस्ट मॉडल कैसे काम करता है, और इसके पीछे कौन-कौन से रणनीतिक निर्णय छिपे हैं। चंद्रयान मिशन: लागत बनाम उपलब्धि सबसे पहले कुछ तथ्य: चंद्रयान-1 (2008) – ल...